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अमेरिकी सीनेट ने 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट' के तहत नए व्यापारिक शुल्क पारित किए

भारत सहित विभिन्न देशों को 100% तक के आयात शुल्क का सामना करना पड़ सकता है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर असर पड़ने की संभावना है।

By SundayShow Desk · Sun, 09 Aug 2026 11:32:57 GMT

अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट' (CAATSA) के तहत एक विधेयक पारित किया है, जिसमें कुछ देशों से आयात होने वाले विशिष्ट उत्पादों पर 100% तक का शुल्क लगाने का प्रावधान है। इस विधेयक का उद्देश्य उन देशों को लक्षित करना है जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के विपरीत कार्य करते हैं, और इसमें भारत भी शामिल हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और भारत के निर्यात पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है।

यह विधेयक मुख्य रूप से उन देशों पर केंद्रित है जो रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ महत्वपूर्ण रक्षा या खुफिया लेनदेन में संलग्न हैं। CAATSA मूल रूप से 2017 में पारित किया गया था, और यह नया संशोधन उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है जो अमेरिकी विदेश नीति के लक्ष्यों के साथ संरेखित नहीं होते हैं।

भारत के लिए इस विधेयक का महत्व विशेष रूप से रूस के साथ उसके ऐतिहासिक रक्षा संबंधों के कारण है। भारत रूस से कई प्रमुख सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आयातक रहा है, जिसमें S-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद भी शामिल है, जिस पर अमेरिका ने पहले ही चिंता व्यक्त की है। ये लेनदेन CAATSA के तहत प्रतिबंधों को आकर्षित कर सकते हैं।

यदि यह विधेयक कानून बन जाता है और भारत पर लागू होता है, तो इसका भारतीय निर्यातकों पर सीधा असर पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिका एक प्रमुख बाजार है। कृषि उत्पाद, वस्त्र, रत्न और आभूषण जैसे निर्यात-उन्मुख भारतीय उद्योग अमेरिकी शुल्कों के कारण अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो सकते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार और राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से मानसून पर निर्भर कृषि क्षेत्र और छोटे व मध्यम उद्यम (SMEs) जो निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, ऐसे शुल्कों से प्रभावित हो सकते हैं। यह भारत के समग्र आर्थिक विकास और व्यापार संतुलन के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

नई दिल्ली में नीति निर्माता इस स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए, दोनों देश व्यापारिक तनाव को कम करने और आपसी हितों को संतुलित करने के लिए राजनयिक चैनलों के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास कर सकते हैं।

आगे चलकर, इस विधेयक का अंतिम रूप और उसका प्रवर्तन भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक व्यापार गतिशीलता के लिए महत्वपूर्ण होगा। भारत सरकार अमेरिका के साथ बातचीत के माध्यम से अपने निर्यात हितों की रक्षा करने और रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखने के लिए समाधान खोजने का प्रयास करेगी।

Reported by the Sunday Show news desk.